सरहद के उस पार
देखना है के हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान को क्रिकेट के बहाने फिर से अपनी हठधर्मिता छोड़ने का मोका दिया है .माझी में झाँका जाये तो भारत के प्रति पाक की निअत साफ नही रही .जब जब दोस्ती का हाथ बढ़ा वो बगल में छुरी दबाकर ही मिला .आज़ादी के बाद की कारगिल तक की जंगें और हमारी संसद पे हमला फिर मुंबई पर हमला ये सब हमारे अमन पैगाम के बाद हमे मिला है .लेकिन अब वक्त है के इस सब के बावजूद भारत की इस पहल को हल्के से न ले .दोनों तरफ के अवं के जज्बातों का एहतराम करे
तो आयिए गिलानी जी मिलते है मोहाली में
सरहद के इस पार

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