Saturday, 13 August 2011

मेरी बात

मेरी बात 
हम कितने समझदार हैं ,इसमें कतई दोराए नहीं ,लेकिन सोचने की बात है 
हम अपने धार्मिक पर्वों को कितनी शिदत से यद् ही नहीं रखते बल्कि मनाते
भी है .मौजूदा वक्त में बात करें तो रक्षा बंधन को ही ले लीजिए हमारी कब से 
तैयारिया चल रही हैं और आज हम पूरी सज धज में है .आखिर यह सब कौन 
समझाता है हमें .हमारा देश -धर्म और  अपना परिवार .ठीक इस पर्व के तीसरे दिन  
यानि सोमवार को हमारा आज़ादी पर्व है . हम में से कितने लोगों ने इसकी 
तयारी पहले से कर रखी है ?अगर यह १५ अगस्त का पर्व हमारे 
शहीदों ने ना दिया होता तो किया आज हम यह दिन मना पाते? इस सवाल की
जवाब -तलबी आधी सदी गुजर जाने के बाद भी हमारे पास नहीं है . लेकिन इस 
बार खाली झंडे की डोर खीच कर ,ताली बजाकर घर नहीं लौटना .हमें देश सर्वोपरि 
होना चाहिए 
आपके साथ 

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